सावन ...........
तुम्हें पता है ,
अबके सावन मुझे उतना नहीं रुलाएगा ,
क्योंकि ,
तेरे होने का एहसास मुझसे लिपट लिपट जाएगा ......
नर्म हवाएँ , मुझे ,
तेरी साँसों सी छू जाएंगी ,
तेरा एहसास गर्म कंबल सा मुझमें सिमट जाएगा ......
तेरी आवाज़ मुझ तक पहुँच जाएगी ,
मेरे क़दम काँच के हो जाएँगे ,,
मन पारा पारा होता जाएगा ,
और मेरा वजूद पिघल पिघल जाएगा ,,,
तू मुझसे कुछ ना कहे चाहे ,
तेरी नज़रों की किरणें ,
मेरी रूह में उतर जाएंगी ,
तेरी आँखों के समंदर ,
मेरी नज़रों की नदी को ,
अपनी आग़ोश में ले कर ,
एक खामोश रवानी देंगे ,
अबके सावन मुझे ...................
तेरे होने का ..............
22/01/2011

अबके सावन मुझे उतना नहीं रुलाएगा ,
क्योंकि ,
तेरे होने का एहसास मुझसे लिपट लिपट जाएगा ......
नर्म हवाएँ , मुझे ,
तेरी साँसों सी छू जाएंगी ,
तेरा एहसास गर्म कंबल सा मुझमें सिमट जाएगा ......
तेरी आवाज़ मुझ तक पहुँच जाएगी ,
मेरे क़दम काँच के हो जाएँगे ,,
मन पारा पारा होता जाएगा ,
और मेरा वजूद पिघल पिघल जाएगा ,,,
तू मुझसे कुछ ना कहे चाहे ,
तेरी नज़रों की किरणें ,
मेरी रूह में उतर जाएंगी ,
तेरी आँखों के समंदर ,
मेरी नज़रों की नदी को ,
अपनी आग़ोश में ले कर ,
एक खामोश रवानी देंगे ,
अबके सावन मुझे ...................
तेरे होने का ..............
22/01/2011



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