रिश्ते .............
कुछ रिश्तों के नाम नहीं होते ..
कुछ रिश्तों के अंजाम नहीं होते ...
कुछ रिश्ते ज़ख्म दे जाते हैं ,
कुछ रिश्ते ज़ख्मों को भर जाते हैं ...
रिसते रिश्ते .......
बूँद बूँद कर ,,
रिस जाता है ...
सारा स्नेह , सारी ममता , सारी कोमलता ,,
सारा प्यार ...
और रह जाते हैं ,,
खोखले घड़े ,
रिश्तों के , खोखले नाम ..
ख़ाली परिभाषाएं ...
रह जाते हैं ,
रीते हाथ .........
हमें पता ही नहीं चलता ,
कि कब ,,
सतरंगी इन्द्रधनुष से रिश्ते ,
पिघल कर बह जाते हैं ....
और रंग बिरंगी टूटी चूड़ियों के कांच से ,
लहूलुहान हमारे पाँव ....
हमें उस इन्द्रधनुष तक नहीं ले जाते ...
जहाँ उस खूँटी पर टँगी ,,
हमें मुंह चिढ़ा रही है , हमारे बचपन की ,,
भोली सी सोच ... कि
जीवन फूलों की सेज है
08/01/2011



0 comments:
Post a Comment