RSS Feed
Posted by Sulekha Pande

स्वप्नभंग  ......


 कई ख्वाब सजाये थे ,
आँखों ने ,
कई मोती पिरोये थे ,
जज़्बातों ने ,
कई फूल सजाये थे ,
उम्मीदों ने ,
आंसुओं का सैलाब ही था ,
ख्वाब धुल कर बह गए ,
मोती बिखरे ,
फूल मुरझाए ,
कितना तीखा होता है ,
स्वप्नभंग ,,
कितना कड़वा ,
मोहभंग ... 
आज सोचती हूँ ,,
क्या वे ख्वाब सचमुच पूरे होते ??
शायद  नहीं ,,
ख्वाब , ख्वाब है ,,
ज़िंदगी ज़िंदगी ..।
ख्वाब ज़िंदगी नहीं बन सकता ,,
ज़िंदगी...............।
ख्वाब नहीं बन सकती ...

28/09/2010



0 comments:

Post a Comment