बुलबुल ..............
बुलबुलें ,
कितना मीठा गाती हैं ,
पर सुना है ,
कि ,
वक़्त के साथ ,
बुलबुल के गले में ,
एक कांटा उग आता है ,
जो उसकी मौत की वजह
बनता है ,
रिश्ते भी कुछ ऐसे होते हैं ,
नर्म , मुलायम , तितली के परों से ,
नाजुक रिश्ते ,
ना जाने कब सख़्त हो जाते हैं ,
ढल जाते हैं ,
एक दायरे में ,
जो टूट जाते हैं ,
पर जुड़ नहीं पाते ,
जुडते हैं , तो पैबंद लग आते हैं ,
मखमल में टाट से ,
रिश्ते तो रिश्ते होते हैं ,
कभी तल्ख़ अलफाज ,
कभी कड़वी जुबान ,
कभी अनजान अजनबी मोड ,
अपने रिश्तों में ,
कांटा मत उगने दो
नर्म रुई से रिश्ते ,
गर्म हाथों से सहेजे जाते हैं ,
नर्म एहसास में लपेटे जाते हैं ,
उन्हें प्यार भरा रहने दो ,
उन्हें प्यार भरा रहने दो ..........
सुलेखा ....
23/02/2011

कितना मीठा गाती हैं ,
पर सुना है ,
कि ,
वक़्त के साथ ,
बुलबुल के गले में ,
एक कांटा उग आता है ,
जो उसकी मौत की वजह
बनता है ,
रिश्ते भी कुछ ऐसे होते हैं ,
नर्म , मुलायम , तितली के परों से ,
नाजुक रिश्ते ,
ना जाने कब सख़्त हो जाते हैं ,
ढल जाते हैं ,
एक दायरे में ,
जो टूट जाते हैं ,
पर जुड़ नहीं पाते ,
जुडते हैं , तो पैबंद लग आते हैं ,
मखमल में टाट से ,
रिश्ते तो रिश्ते होते हैं ,
कभी तल्ख़ अलफाज ,
कभी कड़वी जुबान ,
कभी अनजान अजनबी मोड ,
अपने रिश्तों में ,
कांटा मत उगने दो
नर्म रुई से रिश्ते ,
गर्म हाथों से सहेजे जाते हैं ,
नर्म एहसास में लपेटे जाते हैं ,
उन्हें प्यार भरा रहने दो ,
उन्हें प्यार भरा रहने दो ..........
सुलेखा ....
23/02/2011



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