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Posted by Sulekha Pande

अजनबीपन ....

दर्पण के पीछे है
एक और दर्पण ..
मन के भीतर है ,
एक और मन ..

शब्दों के जाल में ,
अनजाने भाव हैं ,
ऊपर से गहराई
नापते हैं हम ..

रात की सियाही में ,
दर्द के सैलाब पर ,
अँधेरे की चादर ,
तानते हैं हम ..

शूलों के दर्द में ,
फूल जो महका ,
उसकी ही रूह से ,
अनजान हैं हम ..

अपनी ही काया के ,
भीतर जो छाया है ,
उसकी सच्चाई कब ,
पहचानते हैं हम ...

दर्पण के पीछे है ..

 22/12/1998






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