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Posted by Sulekha Pande


RAINBOWS OF LIFE..............

People are busy.........
people are very busy...............
they work round the clock...... trying to meet .....
deadlines............
why the ..rush...??????????
if the lines are alraedy ............dead...........

they rush .... and they .. rush...........
no time for near and dear ones'

covering up their .......rudeness.........
under the cloak of.........PROFESSIONALISM.......

they.... hear......... but don't ......... listen.......
they.... see...........but don't ........... watch........
they ...talk...........but don't............... speak.......
they.... touch.......... but don't ....... feel..........
they.... eat ........ but don't ............. savour.............

look aroud............. wait for a ...... while...........

look at your ... child.........
waiting........ for a ........... hug...........
doesn't it tug at...... your.... heartstrings..........??

what are you trying to ............. achieve.......... ?
the best things in life are...... free........... of cost.............
you are earning ............so much.........
what are you ........... gaining ..........?

because................
you are ........... losing out ...........on ........
a............ LOT.............

by........... 
Sulekha Pande.......

13/ 07/ 2010
 



Posted by Sulekha Pande

EMOTIONS............
 EMOTIONS...............
 EMOTIONS. ............

Mind is the root cause of all problems...

problems grow on mind ...... like........ leaves on trees........
it rationalises.... it analyses...........
it moralises........it demoralises............
it motivates.......... and........ demotivates.......
it pounds... all emotions.......
to a fine dust..............
and the dust .. flies away..........
and what remains..........
is the soft grass of your heart..........
trampled over.......by.. someone's .. hobnailed boots.....
leaving behind.......
the footprints of time.............
the memories........some good...some not so good......
the people who came close to you...........
and fell apart........ and fell apart....... and fell apart...

by....... 


Sulekha Pande........

22/07/2010


Posted by Sulekha Pande

रिश्ते .............


 रिसते रिश्ते ......
कुछ रिश्तों के नाम नहीं होते ..
कुछ रिश्तों के अंजाम नहीं होते ...
कुछ रिश्ते ज़ख्म दे जाते हैं ,
कुछ रिश्ते ज़ख्मों को भर जाते हैं ...
रिसते रिश्ते .......
बूँद बूँद कर ,,
रिस जाता है ...
सारा स्नेह , सारी ममता , सारी कोमलता ,,
सारा प्यार ...
और रह जाते हैं ,,
खोखले घड़े ,
रिश्तों के , खोखले नाम ..
ख़ाली परिभाषाएं ...
रह जाते हैं ,
रीते हाथ .........
हमें पता ही नहीं चलता ,
कि कब ,,
सतरंगी इन्द्रधनुष से रिश्ते ,
पिघल कर बह जाते हैं ....
और रंग बिरंगी टूटी चूड़ियों के कांच से ,
लहूलुहान हमारे पाँव ....
हमें उस इन्द्रधनुष तक नहीं ले जाते ...
जहाँ उस खूँटी पर टँगी ,,
हमें मुंह चिढ़ा रही है , हमारे बचपन की ,,
भोली सी सोच ... कि
जीवन फूलों की सेज है


08/01/2011


Posted by Sulekha Pande

स्वप्नभंग  ......


 कई ख्वाब सजाये थे ,
आँखों ने ,
कई मोती पिरोये थे ,
जज़्बातों ने ,
कई फूल सजाये थे ,
उम्मीदों ने ,
आंसुओं का सैलाब ही था ,
ख्वाब धुल कर बह गए ,
मोती बिखरे ,
फूल मुरझाए ,
कितना तीखा होता है ,
स्वप्नभंग ,,
कितना कड़वा ,
मोहभंग ... 
आज सोचती हूँ ,,
क्या वे ख्वाब सचमुच पूरे होते ??
शायद  नहीं ,,
ख्वाब , ख्वाब है ,,
ज़िंदगी ज़िंदगी ..।
ख्वाब ज़िंदगी नहीं बन सकता ,,
ज़िंदगी...............।
ख्वाब नहीं बन सकती ...

28/09/2010



Posted by Sulekha Pande

सावन ...........


तुम्हें पता है ,

अबके सावन मुझे उतना नहीं रुलाएगा ,

क्योंकि ,
तेरे होने का एहसास मुझसे लिपट लिपट जाएगा ......

नर्म हवाएँ , मुझे ,
तेरी साँसों सी छू जाएंगी ,
तेरा एहसास गर्म कंबल सा  मुझमें सिमट  जाएगा ......

तेरी आवाज़ मुझ तक पहुँच  जाएगी ,
मेरे क़दम काँच के हो जाएँगे  ,,
मन पारा पारा होता जाएगा ,
और मेरा वजूद पिघल पिघल जाएगा ,,,
तू मुझसे कुछ ना कहे चाहे ,
तेरी नज़रों की किरणें  ,
मेरी रूह में उतर जाएंगी ,

तेरी आँखों के समंदर ,
मेरी नज़रों की नदी को ,
अपनी आग़ोश में ले कर ,
एक खामोश  रवानी  देंगे ,

अबके सावन मुझे ...................
तेरे होने का ..............



 22/01/2011



Posted by Sulekha Pande

कंगन ..


तेरी आवाज़ के खरे सोने को ,
पिघला कर ,
एक कंगन बनवा लूँगी ,
और उस पर जड़ूँगी  , 

तेरी आँखों के मोती , 
 तेरी पलकों के आँसू , 
तेरी मुस्कान की हर एक शिकन ,
तेरे पसीने की इक बूंद ,
तेरा एक बूंद लहू ,

और उसे दिल में सँजो कर रखूंगी , 
तेरी उस याद की तरह , 
जो मुझे छोड़ के जाती ही नहीं ,

और मेरी रूह में जज़्ब है , 
तेरे प्यार के उनवान  के जैसा ...........
जो सिर्फ मेरे लिए हो ,
जिसे मैं ही देखूँ ,
जिसे मैं ही पहनूँ ......... 

02/02/2011

Posted by Sulekha Pande

बुलबुल ..............


बुलबुलें ,
कितना मीठा गाती हैं ,
पर सुना है ,
कि ,
वक़्त के साथ   ,
बुलबुल के गले में ,
एक कांटा उग आता है ,
जो उसकी मौत की वजह
बनता है ,  

रिश्ते भी कुछ ऐसे होते हैं ,
नर्म , मुलायम , तितली के परों से ,
नाजुक रिश्ते ,
ना जाने कब सख़्त हो जाते हैं ,
ढल जाते हैं ,
एक दायरे में ,
जो टूट जाते हैं ,
पर जुड़ नहीं पाते ,
जुडते हैं , तो पैबंद लग आते हैं ,
मखमल में टाट से ,
रिश्ते तो रिश्ते होते हैं ,

कभी तल्ख़ अलफाज ,
कभी कड़वी जुबान ,
कभी अनजान अजनबी मोड ,

अपने रिश्तों  में ,
कांटा मत उगने दो
नर्म रुई से रिश्ते ,
गर्म हाथों से सहेजे जाते हैं ,
नर्म एहसास में लपेटे जाते हैं ,
उन्हें प्यार भरा रहने दो ,
उन्हें प्यार भरा रहने दो ..........

सुलेखा ....


23/02/2011